मनुष्य को अकेलेपन का ज्ञान दुःख की अधिकता में ही होता है।
लाखों ग़म हैं इस दुनियाँ में, केवल मेरा ग़म ही गहरा हो ये ज़रूरी नहीं।
यूं ही मिल गयीं नज़रें उनसे अचानक और मैं दिल हार गया मुझे पता भी नहीं चला।
रो लेने दो मुझे आज चैन से, शायद आँसुओं की धार से सारे ग़म बह जाएं।
घमंड किस बात का साहब, इस दुनियां में बड़े बड़े सूरमा ख़ाक में मिल गए।
वक़्त क्या है ये एक दिन वक़्त बतलायेगा, इसलिए वक़्त की कीमत को समझें।
नहीं चाहिए कुछ मुझे तुम्हारे सिवा, काश ये दुआ मेरी कबूल हो जाये।
कहीं साँझ तो कहीं सवेरा है, बस इसी दो बिंदु पर सारे जीवन का फेरा है।
Hum toh tanha tha tanha hi reh Gaye log aata Gaye aur hum phir bhi Akela reh Gaye
तारीफ पे तारीफ,तारीफ पे तारीफ तुम्हारी जुबाॅं तो जरुर थकती होगी| जरा थोडा आराम तो लेने दो मेरे कानोंको|
जब ठान लिया है चांद पर चढ़ना तो किसी से रास्ता पूछने की गुस्ताखी करना बेकार है
ऐसी Google का भी क्या फायदा जिसको यही ना पता हो कि मेरी वाली कहा है
शादी के पहले लोग क्या करते हैं भविष्य के बारे में सोच कर खुश होते हैं और शादी के बाद अतीत को याद करके रोते हैं
जिवन एक नदी है, ना बहे तो गंदी नाली है| बहता रहे तो स्वछ पानी है, जमा हो तो उसमें किडे मकोडे है|
डॉ तुम्हें कौन सी बीमारी है मरीज दिल दीवाना बिन सजना के माने ना डॉक्टर कौन सी दवा चाहिए मरीज चुम्मा चुम्मा दे दे चुम्मा
मेरे पास हाथ से कपड़े धोने की मशीन है एक देहाती ने कहा कहां है दूसरे ने पूछा वह आ रही देहाती ने अपनी पत्नी की ओर इशारा करके कहा
पति देखो श्रीमती जी तुम मेरी माता जी की तरह रोटी बनाया करो पत्नी अच्छा पतिदेव आप भी पिताजी की तरह आटा गूंद कर दिया करो
लड़की तेरी मां बहन नहीं है जो मेरा पीछा कर रहा है लड़का सब हैं बस एक प्रेमिका नहीं है
रमेश मैं और मेरी पत्नी सिर्फ 2 साल तक सुखमय जीवन जीते रहे सुरेश फिर रमेश फिर क्या उसके बाद हम दोनों की शादी हो गई
जज मैं अभी फैसला सुनाता हूं कोई बीच में ना बोले जो बोलेगा उसे बाहर निकाल दूंगा हजूर मैं बोल रहा हूं मुझे बाहर निकाल दो अपराधी बोला
पिता-पुत्र से तुम जरा भी ढंग से काम नहीं करते तुम सिरफिरे हो पुत्र परंतु पिताजी दादा तो कहते हैं कि तुम गधे के बच्चे हो