मैं तो उससे प्यार कर बैठा था न फिर नफरत कब से करने लगा, ......और क्या फर्क पड़ता है कि वो बेवफा है !
जिसको मैं अपना समझता हूं क्या वो मेरी ही है !!!!
हर आईना टूटा लगे सच भी हमें अब झूठा लगे, जिन्दगी का क्या पता है यारों हो सकता है जो आज सच है कल झूठा लगे।
मुझे सालों लग गए अपनी पहचान बनाने में, लोगों को एक पल भी नहीं लगा मुझे भुलाने में।
क्या करूंगा मैं किसी को जानकर जब कोई मुझे पहचानता ही नहीं।
मुझे चाहत नहीं किसी को अपना बनाने की, मुझे चाहत है तो सिर्फ रिश्ते निभाने की।
चाँद भी बादलों में छुप जाता होगा, जब तेरा चेहरा उसके सामने आता होगा।
My thoughts are a symbol of my peace.
ख़ुदा ने भी जब हमें बनाया होगा तो जुदा ना करने की कसम खाया होगा।
क्या कोई हमें जुदा कर सकता है अगर हम न चाहें तो !!!
...अब तो तुम इस दिल में हर पल रहते हो !
एक बार हाँ तो कर तुझे पलकों पर सजा लूंगा, तूँ सपने देख तो सही हकीकत मैं बना दूंगा।
किसी को अपना कर छोड़ना किसी पाप से कम नहीं है !
किसी पर भरोसा करना गलत बात नहीं है, पर भरोसा करते रहना शायद गलत हो सकता है।
किसी का सहारा बनो पर किसी के सहारे मत जिओ।
..अब तो अपने ही साये से डर जाता हूँ मैं, शायद अब किसी को अपना न कह सकूँ !
रंग था मेरी जिन्दगी में, पर जब से सफेद रंग आया मेरी तो दुनियाँ ही वीरान हो गई।
तेरी सोच से शायद परे हूँ मैं, अगर तूँ मुझे समझ पाती, तो किसी और के साथ भागने से पहले ही डर जाती।
शायद भूल तो कभी न सकूं तुम्हें, पर हाँ तुम्हारी याद के साथ मर जरूर जाऊँगा !
तूँ कहती है मुझे भूल जाओ, अरे! तुझे याद करके ही तो जी रहे हैं हम ।
हाँ तूँ बेवफा नहीं है, मुझसे पहले शायद किसी ने तुझे दुआ में मांग लिया होगा..!