दुनिया की सुन वो तोड़ गए रिश्ता, क्या हमारा रिश्ता इतना था सस्ता
मेरी मोत की खबर सुनने को वो बेकरार है, उनके बिना जी नहीं पाएंगे ये उन्हें भी एतबार है
ये जमाना भी बड़ा सता रहा है, कोन अपना है कोन पराया ये पता बता रहा है
रब ने बड़ा बनाया है उसे सयाना, करता है बेवफाई और मजबूरी का बनाता है बहाना
मोहब्बत नहीं है जमाने का दस्तूर ना जाने फिर भी हो जाता है ये कसूर
मानती थी सबसे प्यारा मेरा सनम है, आज पता पड़ा ये मेरा एक वहम है
मेरे होठों तक पहुचता है उनके प्यार का पैमाना, बस जिस्म को पूजता है आज भी जमाना
मत पूछ तु उनके सितम, हर रोज दिखाते है वो बेवफाई के नये करतब
मेरे संघर्ष से सबको पछाड़ना है, मुझे नहीं मेरी सफलता को दहाड़ना है
आज मेहनत का है ये दोर, सफलता का मुझे भी मिलेगा छोर
दर्द में आज भी दिल तड़प उठता है जब तेरी बेवफाई का मंजर याद आता है
लाख दर्द मिले लेकिन अपना घर तो अपना होता है , आज भी उस घर के लिए मेरा दिल रोता है
पत्नी को प्यार करो वो होती है बहुत खास, मत मानो पत्नी को अपना दास
मेरे कर्मो मे रखना ईश्वर अपना वाश, पूरा करना मेरा ये सपना मे नही कहना चाहती कभी काश
बीच रास्ते पे लगा दिया मेरी मोहब्बत का दाम, और मुझे दे दिया बेवफा का नाम
बेवफा कह के मुझे रुलाना आसान था , खुद गैर की बाहो मे जाकर मुझे अकेले सुलाना आसान था
कहा है तू मेरा रब , यहां मुझे सता रहे है सब
अपनी खुशी का पूछ रही हू पता तो बताओ इसमे क्या है मेरी खता
कुछ बनने की मेरी अकेली की जंग है इसमे कोई अपना नहीं मेरे संग है
इशक वो किताब है जिसमे बेवफाई का मिलता खिताब है
मेरी आंखो मे आंसुओ का झरना बहता है, आज भी ये दिल तन्हाई में रोता है