आज के इशक की ये हकीकत है , खूबसूरत सूरत के साथ बदलती शीरत है
तु आज भी मुज मे रहता है , आंसू के रूप में हर रोज निकलता है
उस रब का बन्दा हू इसलिए इतने दर्द मे भी जीन्दा हू
इशक मे शक नहीं हक बसता है
जो मेरे बिना नहीं गुजार सकते थे एक पल , आज वो मेरे बिना सजा रहे है अपना आने वाला कल
उनका प्यार ही तो है जो शायरी लिख रहे हैं, और वो पूछते है हम कैसे प्यार कर रहे है
उस से ज्यादा उसकी याद सताती है, भरी भीड़ में हमे रुलाती है
If you can understand my feelings, so do not explain love in words.
शराब तो यूँहीं बदनाम है, नशा तो तुझे देख कर ही चढ़ जाता है।
आज उनसे बेइंतिहा नफरत है जिनकी कभी हम पलको मे रख के करते थे हिफाजत
आंसुओ मे हर अरमान नीकल रहा है, वो बेवफा मुझे हर पल रुला रहा है
अगर आप मेरी गर्दन काट देते तो सायद उतना दर्द नहीं होता, पर आप ने तो मेरा दिल ही तोड़ दिया।
इश्क़ के दर्द को कोई बयाँ कैसे करे कोई ???
दर्द को बदनाम कैसे करूँ, जब दर्द ही सौगात है उनकी।
मैं इस दर्द को कैसे बयाँ कर पाऊंगा, जब चोट की वजह खुद को ही पाऊंगा।
टूटे दिल की अरदास नहीं "जान" पायेगा जमाना, क्यों कि दिल को "कहाँ" आता है दर्द जताना।
चोट दिल में लगी है मरहम लगायें कैसे, कहते हो दर्द बाँट लेंगे, पर इस दर्द को हम जतायें कैसे।
कौन कहता है चोट लगने से दर्द होती है, दर्द का एहसास तो तब होता है, जब दर्द पर मरहम लगानें वाले न हों।
Big pain also becomes lighter, it is the power of smile.
संगित एक बहुतही अच्छी दवा है| मनुष्यकी चिंता और बिमारीपे बडाही अच्छा असर करती है|
जुनून वाला प्यार चाहिए , मुज पे मरे वो यार चाहिए