क्यूँ बदलू मेरे सीद्धान्त, मेरे सीद्धान्त मेरे आदि है अंत नहीं
जब बेटी लांगती है घर की दहलीज तो क्यूँ कहते हो उसे बदतमीज
जिसके नाम का भरती थी सिन्दूर पता नहीं वो कब हो गया मेरे प्यार से दूर
ये जमाना छोड़ दिया जिसके खातिर वो निकला दिल तोड़ने मे शातिर
Poetry is just pain which is written by the pen
Regression is the biggest pain of the world
आज भी तेरा नाम जब मुझसे जुड़ता है तब हर टूटा अरमान फिर से खिल उठता है
खत्म होगा तानो का शोर जब मेरी सफलता मचाएगी शोर
पत्थर से पानी निकालने की हिम्मत है मोका देके देखो जीन्दा कयामत हू Be strong
ऊन बच्चो को सड़क पे सोते देखा तो सोचा क्यूँ मे रोती हू कम से कम हर रोज घर की छाव मे तो सोती हू
एक लड़की को सिर पे बिठाने वाला नहीं बराबरी का दर्जा देने वाला चाहिए
बातोंमें उलझाके रखना तो कोई तुमसे सिखें,वरना मैं तो कबका काममें लगा होता|
मेरा प्यार,तुम्हारा ईन्कार तुम्हारा प्यार ,मेरा ईन्कार रब जाने जिंदगी कैसे कटेगी|
जजबातोंमें उलझा हूॅं,कहीं रिश्ते टुट ना जाए|
मुबारक हो तुमको समा ये सुहाना,मुझे मेरी तनहाईयाेंके साथ ही है रहना|
रिश्तोंकी नजदिकीयाॅं अपनापन बढानेमें काम आती है|
गरम दिमाग और नरम मिजाज अक्सर परेशानी बढाते है|
कल तक दिल में रहना चाहती थी, आज जान भी लेने आगयी वो !!
मेरी जिन्दगी में आकर मुझको मुझसे मिलाकर जाने कहाँ वो चली गई मुझे सपनें दिखाकर!
सुहाना मौसम और हवाओं में नमी है, बस मेरे यार तेरी ही कमी है!
ख्वाबों का जीन्दा मंजर हू मे, कभी करीब आके देखना टूटी इच्छाओं का शहर हू मे