सुहाग की होती वो रात है जहा लब्जो से नहीं रूह से होती बात है
तु सनम नहीं मेरी जिन्दगी का जूठा वहम है
ऊपर वाला वो फनकार है जो सबको बनाता एक कलाकार हैं
जब तक कुछ नहीं होता हासिल तब तक जमाना कहता है जाहिल
तु वो खूबसूरत सा जाम है जिसे होठो से लगा के पीता हर शाम हू
किसी को बहका कर आप खुद अपने रास्ते का पतन करते हैं।
जो जीवन में सिखती हू वो ही लिखती हू
जो ताना मारने का ढूँढता है बहाना, एक दिन तारीफ करेगा वो ही जमाना
मेरी खता बता दे कहा मिलती है माफी उस दुकान का पता बता दे
जो सच्चा होता है उसके जीवन में सब अच्छा होता है
दिल मे गिटार बजता है धीरे से ठंडी हवा चलती है जब प्यार होता है तब
ख़ुदा मुझे सपनें वही दिखाए जिसे मैं पूरा कर सकूं..!
प्यार सजा है तो भी करने मे मजा है
गुलाम बनके नहीं करती सलाम हर रोज लिखती हूँ सच का कलाम
एक दिन हम भी बनेंगे वो सितारें जिसके लीए लगेंगी कतारे
अंधेरे मे अरमान खिलते हैं जब दो बदन मिलते हैं
मुस्कुरा के कहती हू मे ठीक हू लेकिन अपनो के लिए गयी मे बीक हू
खूद से बोलती हु जुठ जबकि मे जानती हू हर रिश्ता गया है टूट
सफलता भी देगी दर पे दस्तक बस मेहनत करो तब तक
प्यार मे क्यूँ रहना पड़ता है पास चाँद दूर रहके भी चांदनी के लिए होता है खास
आज मे तुमसे दूर हू लेकिन मेरी वफा बताता मेरी मांग का सिन्दूर है