मेरे साथ चल पगली मेरे रास्ते मे ही तेरी मन्जिल आती है।
जिन बच्चो को मा - बाप सिखाते हैं जीने का सलीका, उन बच्चों को ही मा - बाप का बुढ़ापे मे नही अच्छा लगता तरीका
सफलता तो अंधेरो मे भी मिलती है लोग फालतू मे माहोल का बजाते है ढ़ोल
मेरा यार जब रूठता है और भी हसीन दिखता है
मेरा जो हक है, मैं उसे मांगता नहीं छीन लेता हूँ।
आँखो मे आता है पानी लेकिन नहीं रुकती मेरी संघर्ष की कहानी
काश की तस्वीर और तकदीर में कोई फर्क नहीं होता, तस्वीर की तरह तकदीर का चेहरा भी मुस्कुराता रहता
जब से उनसे हुए हैं मुख़ातिर उन्हे माना है अपनी तकदीर
गम ए मोहब्बत अजीब होता है जो कभी नहीं मिलता वो ही दिल के करीब होता है
मेरी ख्वाहिशों पे लगाके बंदीशे वो कर रहे है मेरे खिलाफ सादीशे
तरीखे बदल जाती है लेकिन यादे आज भी वही रह जाती है
गलत के आगे झुकने से अच्छा टूटना है
भूख भी है प्यास भी है लेकिन प्रभु इस जहन मे छिपी एक ही आश है
इतनी बेवफाई के बाद आज भी कुछ बचा है, पता नहीं इन लकीरों में और क्या रचा है
भरोसा कर के थामा था जिनका दामन उन्होने दिया आंसुओ का सावन
अच्छा होता है कहना अलविदा, अगर कोई साथ रह के रहे जुदा
तेरे मासूम से चेहरे पर वो हंसी याद आती है, मेरी जिन्दगी में तेरी कमी मुझे खल जाती है।
जो मुझे पसंद है वो इस जहां में नहीं, इस जहां में नहीं तो कहीं नहीं ! ...अरे साला मेरे शायरी की तो झंड हो गयी?
वक्त की चोट खा कर बचा हूं जिन्दा, मुझे रोको मत हूं मैं आजाद परिन्दा।
लडकियोंको सिर्फ फुल और कलियॅां समझनेकी गलती कभी भी ना करें, वक्त आने पर वह अंगार भी हो सकती है|
इशक यहा सबको कहा होता है ये जहां तो नसीब वालों को मिलता है